About the Author
Osho
ISBN 9789937758369
Rs. 200
Sambhog Se Samadhi Ki Aur
अगर चाहते हैं कि पता चले कि प्रेम-तत्व क्या है, तो पहला सूत्र है- काम की पवित्रता, दिव्यता, उसकी इश्वरीय अनुभूति की स्वीकृति, उसको परम हृदय से, पूर्ण हृदय से अंगीकार । और आप हैरान हो जाएंगे, जितने परिपूर्ण हृदय से काम की स्वीकृति होगी, उतने ही आप काम से मुक्त होते चले जाएंगे। जितना अस्वीकार होता है, उतने ही हम बंधते हैं। जितना स्वीकार होता है, उतने हम मुक्त होते हैं। अगर परिपूर्ण स्वीकार है, टोटल एकसेप्टबिलिटी है जीवन का जो निसर्ग है उसकी, तो आप पाएंगे कि वह परिपूर्ण स्वीकृति को मैं आस्तिकता कहता हूं, वही आस्तिकता व्यक्ति को मुक्त करती है । जीवन जैसा है, उसे स्वीकार करो और जीओ उसकी परिपूर्णता में। वही परिपूर्णता रोज-रोज सीढ़ियां-सीढ़ियां ऊपर उठाती जाती है। वही स्वीकृति मनुष्य को ऊपर ले जाती है। और एक दिन उसके दर्शन होते हैं, जिसका काम में पता भी नहीं चलता था। काम अगर कोयला था तो एक दिन हीरा भी प्रकट होता है प्रेम का ।
Available formats
1 formatPaperback
Physical
All 77 Districts COD
Nationwide cash on delivery
7-day exchange
Damage or wrong edition
Genuine print
Direct from publishers
Specifications
8 detailsAbout the author
Community Reviews
Sign in to Write a ReviewWrong edition? Want a different title?
Tell us about a book, edition or format you'd like us to stock — or flag anything off about this page.
Sign in to send us a message - it lets us reply and keeps out spam.
Sign in


